अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना ?

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अम्बेडकर ने अपने बहुत से लेखों और भाषणों में समझाने की कोशिश की है कि हिंदू धर्म सामाजिक भेद-भाव, शोषण, तथा छुआछुत को एक धार्मिक आधार प्रदान करता है। इस धर्म के अनुसार, हिंदू समाज चार वर्णों में बंटा है, जिससे अनेक जातियाँ निकलीं। कुछ जातियों  को ऊचाँ तथा कुछ को निम्न स्थान प्राप्त है। इसलिए, उच्च जातियों द्वारा निम्न जातियों का दमन स्वाभाविक माना जाता है। अम्बेडकर कहते हैं कि ऐसा धर्म जो समाज में असमानता को आधार प्रदान करे, उसका परित्याग कर देना चाहिए। यही कारण है कि उन्होने हिंदू धर्म का त्याग किया।

Image source: thestandpoint.in

लेकिन अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना ? उनके अनुसार किसी भी धर्म को समता, स्वतंत्रता, तथा भाईचारे पर निर्भर होनी चाहिए। बौद्ध धर्म एक ऐसा ही धर्म है। बौद्ध धर्म में किसी भी प्रकार का सामाजिक विभाजन नहीं मिलता है। औरतों को भी समान स्थान प्राप्त है, वे भी निर्वाण प्राप्त कर सकती हैं।

चूँकि सभी लोग समान हैं, सभी लोग स्वतंत्र भी हैं। बौद्ध धर्म में बाहरी आडम्बरों, अंधविश्वास आदि का खण्डन मिलता है। बौद्ध धर्म के अनुसार, मनुष्य स्वयं ही स्वयं का दीपक बन सकता है। उसे अपने निर्वाण मार्ग में किसी ब्राह्मण, मौलवी, पादरी, या किसी भी और व्यक्ति की आवश्यक्ता नही है। अतः सामाजिक तथा मानसिक सभी प्रकार की आज़ादी पर ज़ोर दिया गया है। इसी कारण अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म ही चुना। उन्होने लोगों को धम्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।

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