डा. अम्बेडकर के विचारों से मेरा परिचय तथा उनका प्रभाव

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तकरीबन मैं दस साल की थी जब मैं अपने गांव से बाज़ार जाते समय एक मूर्ति देखी। नीले रंग का कोट, हाथ में एक पुस्तक, काली फ्रेम का चश्मा बहुत आकर्षित करता था। मैंने माँ से पूछा कि ये किसकी मूर्ति है? माँ को नाम तो पता नहीं था इसलिए मैंने पापा से पूछा तो यह पता चला कि मूर्ति अम्बेडकर की है। मेरी यह जानने की यह इच्छा हुयी आख़िर ये हैं कौन? चौराहे पे एक गाँधी की मूर्ति भी है।  लेकिन गाँधी के बारे में तो मुझे बहुत कुछ पता है। किताबों में बहुत सारे लेख गाँधी पे लिखे मिलते हैं। लेकिन उन्हीं किताबों में  अम्बेडकर का परिचय दो – तीन  पंक्तियों से अधिक नहीं मिलता। उनके जन्म दिवस पर भी उनके बारे बातें नहीं होती।

  मैंने बी. ए. में दाखिला लिया। वहां मेरे एक विषय के एक अध्याय में अम्बेडकर के विचारों पर एक पन्ने की व्याख्या थी। हिंदी भाषा के पाठ्य-पुस्तकों में विश्लेषणात्मक विवेचना कम ही मिलता है।हिन्दू धर्म के आलोचक, जाति व्यवस्था के विरोधी तथा सविंधान निर्माता जैसे परिचय तो इन किताबों में मिलते लेकिन उनके विचारों, विश्लेषणों और तर्कों के बारे में न के ही बराबर सामग्री मिलती।

Image source: indianhistorycollective.com

मैने पहली बार अम्बेडकर की Annihilations of Caste जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अपने एम. ए. के दौरान पढ़ी। इस छोटे से लेख ने मेरे संसार और समाज की सारी समझ को हिला डाला। वह जिस प्रकार के भारत की परिकल्पना करते हैं उस पर विचार-विमर्श तो दूर उन पर बात तक नहीं होती।

अम्बेडकर के अनुसार किसी भी देश की बुनियाद समता, स्वतंत्रता, तथा भाईचारे पर निर्भर होनी चाहिए। जाति-व्यवस्था का जब तक निर्मूलन नही होता तब तक भारत में तो सामाजिक और राजनितिक समानता आ सकती है, और ना ही लोग स्वतंत्रत हो सकते हैं। जाति-व्यवस्था भारतीय समाज के विभाजन का आधार है, छुआ-छूत तथा भेद-भाव की जड़ है। इसलिए यह भाईचारे को स्थापित नही कर सकता। यही कारण है कि जाति-व्यवस्था का निर्मूलन अम्बेडकर के लिए बहुत ही आवश्यक है।

लेकिन अम्बेडकर के इन विचारों पर बात और विचार करने से हमारे स्कूल-कालेज भी बचते है और हमारे नेता भी। अम्बेडकर को केवल एक दलित चिंतक के रूप में सीमित करके उनके विचारों को संकुचित तथा अप्रासंगिक दिखाया जाता रहा है। इसलिए हमारा यह दायित्व इसलिएहमारा यह दायित्व है कि हम इन विचारों को पढ़ें, इन पर बात करें तथा इन्हें प्रसारित करें।

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