हम रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं ?

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हम रक्षाबंधन क्यों मानते हैं ? इस प्रश्न पर जाने से पहले हम इस बात पर सोच सकते हैं कि हम कोई भी त्योहार क्यों मानते हैं। हिन्दुओं के अधिक्तर त्योहार ऐसे हैं जिनका उल्लेख या महत्व किसी भी धार्मिक किताब में नहीं मिलता। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इन त्योहारों को मनाने के पीछे कारण क्या है? भारतीय परंपराएं रीज़न यानी तर्क पर आधारित नही होता, वरन् प्रैक्टिस यानी अनुकरण पर आधारित होता है। दार्शनिक जकोब डे रूवर के अनुसार पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण भारतीयों ने अपने रीति-रिवाजों के कारण खोजने लगे। जबकि लोग अपने पूर्वजों के ज़माने से चले आ रहे रिवाजों को बिना कारण जाने पालन करते आ रहे थे। यही कारण है कि जब कोई पछता है कि हम रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं, तो लोग कारण से ज़्यादा कब किसने राखी बाँधी यह बताने लगते हैं।

भारत में कई सारी परंपराएं ऐसी है, जो हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, तथा अन्य भी अनुकरण करते हैं। इसलिए राखी भेजकर रक्षा करने की गुहार लगाने वाली कथाएं मुस्लिम शासकों के बीच की भी मिलती है। अब एक बात तो तय है कि राखी कोई कमज़ोर किसी बलशाल को बाँधता है और उससे रक्षा की उम्मीद करता है। लेकिन इसे भाई-बहन के त्योहार के रूप में मनाने की प्रथा बहुत पुरानी नहीं है। इस बात का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि उत्तर-प्रदेश और बिहार के गाँवों की 80 साल से ज़्यादा की दादी-नानियों ने यह त्योहार नहीं मनाया है।

सवाल यह भी उठता है कि केवल बहन ही भाई को राखी क्यों बांधती है, छोटा भाई अपनी बहन से रक्षा की उम्मीद क्यों नही कर सकता। हमारे समाज में स्त्रियाँ इतनी कमज़ोर क्यों मानी जाती हैं कि उन्हें किसी रक्षक की ज़रुरत है। कमज़ोर होने का सम्बंध शारीरिक बल के अभाव से ना होकर, बल्कि आप कितना दूसरों पर निर्भर हैं, इस बात से है। अब औरतों के पास किसी प्रकार की सम्पत्ति पर अधिकार नहीं होता, इस कारण वह पुरुषों पर निर्भर हो जातीं हैं। कहने को तो कानूनन औरतों का भी पिता की सम्पत्ति में बराबर का अधिकार है, लेकिन इसकी बात कोई नही करता ? दहेज़ तो ससुराल वालों के हाथ में जाता है और पति की सम्पत्ति पर भी कोई अधिकार नही मिलता। ऐसे में औरतों का भाग्य दूसरों के भरोसे हो जाता है, जैसे कि पहले पिता, फिर पति, और फिर बेटे।

लेकिन औरतो को किसी रक्षक के बजाय आत्मनिर्भर या आत्मरक्षक बनने की ज़रुरत है। इसलिए उनकी शिक्षा, नौकरी तथा संपति पे अधिकार की बात करना बहुत आवश्यक है। अगर आप सच में अपनी बहन की रक्षा करना चाहते हैं तो उसे अच्छी शिक्षा और पैतृक संपति में उसे हिस्सा दीजिये।

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