अकादेमिक लेख/ शोध पत्र कैसे लिखें ? (How to Write a Research Paper)

Spread the love

यह प्रश्न हर एक उस विद्यार्थी के लिए आवश्यक है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता/चाहती है। एक अच्छा लेख किसी विषय का समीक्षात्मक व्याख्यान होता है। एक लेख शिक्षार्थी की न केवल विषय पर समझ को प्रदर्शित करता है, बल्कि उसके उस विषय पर अपने विचारों को भी दिखता है। लेख लिखने से पहले उसके लिए तैयारी करना बहुत ज़रूरी है। इसमें सबसे पहला चरण है लेख का विषय चुनना।  दूसरा, उस विषय पर शोध तथा अध्ययन करना, तथा अंत में लिखना शुरू करना।

विषय का चुनाव:

इसके लिए विद्यार्थी को यह देखना चाहिए कि उसे किस क्षेत्र में रुचि है। अगर इस बात में भी असमंजस लगे तो अलग-अलग विषयों पर पढ़ना शुरू करना चाहिए, फिर यह निर्णय लेना चाहिए कि किस विषय में ज्यादा रुचि है। मान लीजिये, आपने अपने राजनितिक विज्ञान की कक्षा में तीन टॉपिक पढ़ा है, जिनमें से एक पर आपको एक लेख लिखना है, तो आपको इन विषयों की सामग्री पर एक नज़र डालनी चाहिए और अपना टॉपिक तय करना चाहिए।

शोधपत्र के प्रकार:

शोध के विषय को चुनते ही यह भी निर्धारित हो जाता है कि आपका शोधपत्र किस प्रकार होगा। मुख्यतः शोधपत्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

a) व्याख्यात्मक शोध पत्र
b) तुलनात्मक शोध पत्र
c) विश्लेणात्मक शोध पत्र
d) प्रयोगात्मक शोध पत्र

विषय पर अध्ययन तथा शोध:

जिस भी विषय पर आपको लेख लिखना है, उस पर आपको काम से काम एक सप्ताह अध्ययन करने तथा सोचने के लिए देना चाहिए। इस  दौरान आपको प्राथमिक तथा गौड़ विषय-सामग्री दोनों का प्रयोग करना चाहिए। जैसे ही आपके अंदर विषय की समझ विकसित होने लगे, साथ ही लेख के उद्देश्य और महत्त्व के बार में भी थोड़ी स्पष्टता आने लगे, तब आपको लिखना शुरू कर देना चाहिए।

लेखन प्रक्रिया:

किसी भी लेख की एक  मूलभूत संरचना होती है, उसे समझना बहुत ज़रूरी है।  एक लेख के तीन मुख्य भाग होते हैं: १) परिचय (introduction), २) प्रधान भाग (body), और  ३) निष्कर्ष (conclusion)।

परिचय और निष्कर्ष बाद में लिखा जाना चाहिए।  सबसे पहले प्रधान भाग लिखना शुरू करना चाहिए (जाहिरतौर पर दिमाग लेख के  भूमिका की एक धुंधली छवि तो बन ही गई जानी चाहिए।) प्रधान भाग का भी एक परिचय, एक मुख्य भाग, तथा निष्कर्ष होता है। इसमें अपने विषय की विवेचना इस तरह से करनी चाहिए कि वह आपके लेख के मुख्य उद्देश्य तथा उसके महत्व पर प्रकाश डाल सके। निष्कर्ष में कुछ भी नया नहीं लिखना चाहिए, मुख्य या प्रधान भाग में लिखे हुए बिन्दूओं का संक्षिप्त विवेचना करना चाहिए।

लेखन प्रक्रिया की समझ एक अच्छे लेख को जन्म दे सकती है। लिखने से पहले विषय-वस्तु की तैयारी बहुत ज़रूरी है। जितना आप किसी विषय के बारे में समझ सकेगें, उतना ही अच्छा लेख आप लिख सकते हैं। लेख को बार-बार पढ़के उसके कमियों को पहचानना तथा उन्हें दूर करना बहुत ज़रूरी है। इसलिए पुनर्वलोकन (revision) बहुत ही आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *