NET/JRF की तैयारी करने की सही रणनीति

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NET/JRF करने का सही तरीका क्या है? या नेट/जे.आर.एफ़ कैसे करें? JRF के लिए सही रणनीति क्या है ? इन सब प्रश्नो के उत्तर हम यहाँ देने की कोशिश करेंगे। सभी विद्यार्थीयों का बैकग्राउंड अलग होता है। जहाँ एक ओर, अलग-अलग छात्रों का अलग-अलग विषयों पर मजबूत पकड़ होती है। वहीं दूसरी ओर, उनकी कमजोरियां भी अलग-अलग होती हैं। यही कारण है कि सभी के लिए तैयारी करने की रणनीति भी अलग होनी चाहिए।

इस लेख का उद्देश्य कोई सामान्य रणनीति बताना नहीं है बल्कि आपको अपनी क्षमता के अनुसार अपने लिए रणनीति बनने में मदद करना है। हमारा सुझाव आपको अपने लिए केवल रणनीति ही नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण अध्ययन योजना (complete study plan) बनाने में सहायता करेगा।

NET/JRF की रणनीति

अपनी क्षमताओं को समझना

NET/JRF की कोई भी रणनीति बनाने से पहले आपको यह समझना होगा कि परीक्षा क्या है और इसके लिए किस प्रकार की जानकारियों की ज़रुरत होती है। इसमें दो पेपर्स होते है – 1. शैक्षिक तथा शोध अभिवृत्ति तथा 2. मुख्य विषय (जैसे: हिंदी, राजनीतिक विज्ञान, इतिहास, आदि।) इन दोनों विषयों के पाठ्य-क्रम का अच्छे से विश्लेषण करना चाहिए ताकि यह समझ में आ सके कि इन विषयों पर आपको कितनी जानकारी है। दूसरी तरीका यह भी है कि पिछले कुछ सालों के प्रश्न-पत्रों का विश्लेषण करें। इनके सवालो को हल करें और देखें कि आपको पूरे सिलेबस में कौन से ऐसे विषय हैं जो अच्छे से आते हैं तथा कौन से ज़्यादा कमजोर हैं।

समय-संयोजन

जब आपको एक बार अपनी क्षमता का पता लग जाय तो आप आसानी से यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपको कितना समय तैयारी में लगेगा। साथ ही, यह भी समझने में आसानी होगी की आपको किस विषय पर कितना समय देना है। समय संयोजन करते समय यह ध्यान दें कि परीक्षा से एक सप्ताह पहले आपको सिलेबस ख़त्म करना है। क्योंकि इस एक सप्ताह में अच्छे से रिविज़न कर सकें या दुहरा सकें।

नोट्स बनाना:

भले ही आपने बाज़ार में उपलब्ध सहायक किताबें ख़रीद लीं हों। उनके अंत में नोट्स भी दिए हों। लेकिन, आपको खुद के नोट्स बनाना चाहिए। नोट्स बनाने से एक फ़ायदा तो यही है कि रिविजन में आसानी हो जायेगी। अलग-अलग जगहों से मिली जानकारियों को एक ही जगह लिखें। सारे नोट्स एक ही जगह पर उपलब्ध होंगे, तो बार-बार ढूंढना नहीं पड़ेगा।

ऐसे टॉपिक्स जो आपको कठिन लगते हैं, उनको लिखने से भी समझ विकसित होती है। इसलिए, कठिन विषयों के नोट्स ज़रूर बनाते रहिये। नोट्स दोनों पेपर्स के लिए बनाना चाहिए। छात्र/छात्राएं हमेशा यह भूल करते हैं कि एक पेपर पर ज़्यादा समय देते हैं तथा दूसरे पर कम।

तैयारी की सही रणनीति और टिप्स

जितना भी समय आपको हर दिन पढ़ने में देना है उसे दो भागों में बाँट लें। पहले भाग में ऐसे टॉपिक्स को पढ़े जिनके बारे में आपको थोड़ी जानकारी पहले ही हो। या, उन्हें समझना आपके लिए आसान हो। दूसरे भाग में, उन विषयों को रखें जो आपको कठिन लगते हैं। इस तरह, हर दिन कठिन और आसान दोनों प्रकार के टॉपिक्स को पढ़ें और नोट करें। जितना ज़्यादा टॉपिक कवर होगा, इससे आपका उतना ही कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

ज़्यादा देर तक पढ़ने के बजाय कोशिश करें कि जितनी देर भी पढ़े फोकस के साथ पढ़े। दो घंटे बिना ध्यान के पढ़ने से अच्छा है कि आधा घंटा ध्यान से पढ़ा जाय। अतः, ऐसे कार्यों या विचारों से दूर रहें, जिनके कारण आपका ध्यान बंटता हो।

साथ ही, यह भी समझने की कोशिश करें कि आपको किन श्रोतों से पढ़ने से ज़्यादा आसानी से समझ आता है। मतलब, आपको किताब या लेख पढ़ना पसंद है या वीडियो द्वारा पढाई करने में आसानी होती है। अपने सुविधा के अनुसार श्रोत चुने।

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