पी.एच.डी. थीसिस: क्या और कैसे?

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पी.एच.डी. थीसिस:

पी.एच.डी. थीसिस एक शोध रिपोर्ट होता है। इस रिपोर्ट में एक शोध समस्या का संभावित समाधान प्रस्तुत किया जाता है। इसमें शोधार्थी यह स्पष्ट करता है कि प्रस्तुत समस्या क्यों महत्वपूर्ण है और उसके द्वारा प्रस्तुत किया समाधान कैसे इस समस्या को दूर करते है। साथ ही, कैसे इस समस्या का समाधान आगे शोध में योगदान देता है, इसका भी वर्णन करना होता है। आगे, शोध रिपोर्ट की मुख्य विशेषता है उसकी नवीनता यानी इसमें प्रस्तुत समाधान पहले से ही दिया हुआ न हो; शोधार्थी द्वारा ही मूलरूप से प्रस्तुत किया गया हो। इसलिए एक थीसिस असाइनमेंट से अलग होता है।

स्पष्टतः, शोधार्थी को यह पता होना चाहिए कि उसके पाठक कौन है। आपके थीसिस का सबसे पहला पाठक आपका सुपरवाइसर होगा और उसके बाद परीक्षक जो आपके शोध विषय और शोध-समस्या को समझते है, तथा आपके द्वारा प्रस्तुत समाधान के विषय में निर्णय ले सकते हैं।

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विषय चुनना

विषय चुनना: शोध के दौरान एक अच्छा विषय चुनना एक आवश्यक कार्य है। एक अच्छा विषय चुनने के लिए अपने शोध क्षेत्र के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। इसे एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है:

सामान्य शोध क्षेत्र: राजनितिक विज्ञान

विशेष शोध क्षेत्र: राजनितिक उदारवाद की समस्याएँ

केंद्र बिंदु: रॉल्स का राजनितिक उदारवाद

सन्दर्भ: भारतीय सन्दर्भ में

विषय: भारतीय सन्दर्भ में रॉल्स का राजनितिक उदारवाद तथा उसकी समस्याएँ

उपर्युक्त उदाहरण का मुख्य उद्देश्य यह दिखना है कि कैसे एक विस्तृत विषय सामग्री को संक्षिप्त किया जा सकता है। शोधार्थी को सामान्य से विशेष की ओर बढ़ना चाहिए यानी पहले अपने विषय क्षेत्र से जुड़े सामान्य समस्याओं को समझना चाहिए। फिर, किसी एक विशेष विषय की ओर अपने अध्ययन को केंद्रित करना चाहिए।

लेखन प्रक्रिया:

पी.एच.डी. थीसिस लेखन को कार्य के आधार पर हम दो भागों में बाँट सकते है – १. पठन (Reading) और २. लेखन (Writing)।

  1. Reading: थीसिस लिखने से पहले यह ज़रूरी है कि शोधार्थी को उसके शोध-क्षेत्र से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों, समस्याओं, तथा डिबेटों के बारे में जानकारी हो। इसलिए, शोधार्थी को अपने शोध क्षेत्र से जुड़े साहित्य को ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ना चाहिए। किसी भी किताब या लेख को पढ़ते समय उसके मुख्य समस्या तथा परिणामों और तर्कों को नोट करना चाहिए।
  2. Writing: थीसिस लिखने से पहले उसकी एक सरंचना तैयार की जानी चाहिए। यह आमतौर पर रिसर्च प्रपोजल लिखते समय ही स्पष्ट हो जाता है। फिर भी, हर एक अध्याय की अपनी सरचना होती है जिसको शोधार्थी थीसिस लिखने से पहले ही तैयार कर लेता है।

अन्ततः, थीसिस लिखना शोध-प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसके द्वारा शोधार्थी अपने शोध परिणामों को अपने पाठकों तक पहुँचाता है। इसलिए, थीसिस लेखन के कौशल को शोधार्थी को बहुत ही धैर्यपूर्वक सीखना चाहिए।

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